अफ़ज़ल हुसैन
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पहचान: शिक्षाविद, बाल साहित्यकार और जमात-ए-इस्लामी हिंद के रहनुमाअफ़ज़ल हुसैन ख़ान का जन्म 2 जनवरी 1918 को ज़िला बस्ती (उत्तर प्रदेश) के ग्राम जान्थे डीहा में हुआ था। उनके पिता का नाम मनसब दार ख़ान था। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा दुधरा के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की, जबकि मिडिल और हाई स्कूल की शिक्षा ख़ैर इंटर कॉलेज बस्ती से पूरी की। इसके बाद, उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से इंटरमीडिएट (1937) और बी.ए. (ऑनर्स, अंग्रेजी) 1939 में उत्तीर्ण किया। सन 1940 में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एल.टी. (वर्तमान बी.एड.) की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से एम.ए. भी किया।उन्होंने 1941 से 1948 तक विभिन्न सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों (ट्रेनिंग सेंटर्स) में शैक्षणिक और प्रशासनिक सेवाएँ प्रदान कीं, लेकिन 1948 में यह रुख अपनाते हुए सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली इस्लामी दृष्टिकोण से संतोषजनक नहीं है। इसके बाद वे केंद्रीय दरसगाह-ए-इस्लामी रामपुर और जमात-ए-इस्लामी हिंद के शैक्षणिक और संगठनात्मक कार्यों से जुड़ गए।अफ़ज़ल हुसैन ख़ान अपनी युवावस्था में ही मौलाना सैयद अबुल आला मौदूदी के विचारों से प्रभावित हो गए थे और 1944 में उन्होंने जमात-ए-इस्लामी की सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने जमात-ए-इस्लामी हिंद के शैक्षणिक, प्रशिक्षण और संगठनात्मक विभागों में लंबी सेवाएँ दीं। वे लगभग पंद्रह वर्षों तक केंद्रीय दरसगाह-ए-इस्लामी के प्रबंधक (नाज़िम) रहे और शिक्षा विभाग से पच्चीस वर्षों तक जुड़े रहे। वे 1963 से 1970 तक जमात-ए-इस्लामी हिंद के सहायक सचिव, जबकि 1972 से 1989 तक जमात-ए-इस्लामी हिंद के महासचिव के पद पर कार्यरत रहे।शिक्षा और दीक्षा (तालीम व तरबियत) उनके जीवन का मुख्य विषय था। उन्होंने बच्चों और युवाओं के लिए कई सुधारात्मक, नैतिक और शैक्षणिक पुस्तकें लिखीं और संकलित कीं। उनकी प्रमुख रचनाओं में "फ़न-ए-तालीम व तरबियत", "हमारी दुनिया", "आइना-ए-तारीख़", "हमारे नग़मे", "आम मालूमात", "हमारी किताब" और "मोतियों का हार" शामिल हैं। विशेष रूप से "फ़न-ए-तालीम व तरबियत" को उर्दू में शिक्षाशास्त्र (Pedagogy) के विषय पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रामाणिक पुस्तक माना जाता है।निधन: अफ़ज़ल हुसैन ख़ान का निधन 1 जनवरी 1990 को नई दिल्ली में हुआ।