अकबर शाह ख़ाँ नजीबाबादी

अकबर शाह ख़ाँ नजीबाबादी

लेखक

इस लेखक की 28 प्रकाशित कृतियों का अन्वेषण करें — सच्चे पाठकों के लिए संकलित

about_role_name

पहचान: इस्लामी विद्वान, इतिहासकार, सीरत लेखक और साहित्यकारमौलाना अकबर शाह नजीबाबादी भारतीय उपमहाद्वीप के उन प्रतिष्ठित विद्वानों और लेखकों में गिने जाते हैं जिन्होंने इतिहास, सीरत, समाज और साहित्य के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी लेखनी में ज्ञान की व्यापकता, शोध की ईमानदारी और सरल किंतु प्रभावशाली शैली दिखाई देती है, जिसके कारण वे अपने समय के विश्वसनीय इतिहासकार माने जाते हैं।मौलाना अकबर शाह नजीबाबादी का जन्म 1857 में नजीबाबाद (जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश) में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने शिक्षण कार्य से जुड़कर 1878-79 के आसपास शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में सेवा दी।1906 से 1914 के बीच वे कादियान में रहे और कादियानियत के प्रभाव में आ गए। इस दौरान उनका संबंध हकीम नूरुद्दीन से घनिष्ठ रहा और उन्होंने उनकी जीवनी “मरक़ात अल-यक़ीन फ़ी हयात नूरुद्दीन” का पहला भाग लिखा। कादियान में वे मदरसा तालीम-उल-इस्लाम के छात्रावास के अधीक्षक भी रहे और शिक्षण कार्य करते रहे।1914 में हकीम नूरुद्दीन के निधन के बाद परिस्थितियाँ बदलीं और उन्होंने कादियानियत से अलग होने का निर्णय लिया। कुछ समय तक वे लाहौरी समूह से जुड़े रहे, लेकिन शीघ्र ही उससे भी अलग होकर पूर्ण रूप से इस्लाम की ओर लौट आए। इसके बाद उन्होंने अपने जीवन को शोध, लेखन और धार्मिक सेवाओं के लिए समर्पित कर दिया।कादियानियत से अलग होने के बाद उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ साहित्यिक और शैक्षिक कार्य किया। उन्होंने लगभग तीस पुस्तकें लिखीं, जिनमें “तारीख-ए-इस्लाम” सबसे प्रसिद्ध है और उर्दू इतिहास लेखन में एक महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है। सीरत और इस्लामी इतिहास पर उनकी अन्य कृतियाँ भी अत्यंत सराही जाती हैं।उनकी रचनाओं की सराहना समकालीन विद्वानों, विशेष रूप से अल्लामा इकबाल जैसे विचारकों ने भी की। उनकी भाषा सरल, प्रभावशाली और सहज थी, जिससे वे व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचे।निधन: 10 मई 1938 को नजीबाबाद (उत्तर प्रदेश) में उनका निधन हुआ।

books_by_name

Sponsored Advertisement